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Showing posts from July, 2017

सलूक जिससे किया मैने आशिकाना किया:

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    विमलेंदु जी द्वारा जीवन क्या जिया और क्या खूब जम  द्वारा नामवर जी के जन्मदिन पर नायाब और महत्वपूर्ण आलेख.....                 सलूक जिससे किया मैने आशिकाना किया ===========================           28 जुलाई को नामवर सिंह जब नब्बे साल के हुए तो उनके विरोधी उन्हें चुका हुआ मानकर उत्साह के अतिरेक में थे. उनके जन्मदिन पर इन्दिरा गाँधी कलाकेन्द्र, दिल्ली में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें गृहमंत्री राजनाथ सिंह और संस्कृति मंत्री महेश वर्मा भी शामिल हुए. नामवर विरोधी कई दिन पहले से अफवाह उड़ा रहे थे कि नामवर संघी हो गए हैं. सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने अभियान चला कर लोगों को भ्रमित किया. नामवर की छवि और निष्ठा पर यथाशक्ति प्रहार किए गए. लेकिन नामवर तो नामवर ही ठहरे ! सरकार से मुखातिब होकर कह आए कि समालोचक सरकार और सत्ता का प्रतिपक्ष होता है. और यह भी प्रकट कर दिया कि वे अभी दस साल और जीना चाहते हैं ताकि कुछ लोगों की छाती पर मूँग दल सकें. तो लीजिए श्रोताओं को मुग्ध करते, विरोधियों को चित...

'आषाढ़ का एक दिन' का मंचन

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समीर कुमार पाण्डेय की एक रपट ***********************         आज बापू भवन बलिया में लगातार जोरदार बारिश के बावजूद संकल्प साहित्यिक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था, बलिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ जनार्दन राय जी ने दीप प्रज्वलित कर किया।         जिसके प्रथम सत्र में संकल्प के सचिव आशीष त्रिवेदी की अगुआई में 'संकल्प' द्वारा जनपद के साहित्य कला प्रेमियों की उपस्थिति में साहित्य जगत के प्रख्यात कवि अनहद पत्रिका के सम्पादक, 'मोछू नेटुआ' जैसी महत्वपूर्ण कविता के प्रणेता संतोष चतुर्वेदी, अपनी देसज भाषा के शब्दों से चकित कर देने वाले कहानी लेखक असित मिश्र और अद्भुत रंगकर्मी अमित पाण्डेय को संकल्प सम्मान-2017 से सम्मानित किया गया। यह क्षण बलिया जैसे छोटे शहर के नगरवासियों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण था।       कार्यक्रम के दूसरे सत्र में मोहन राकेश कृत नाटक 'आषाढ़ का एक दिन' का सफल मंचन आशीष त्रिवेदी के निर्देशन में किया गया। 'आषाढ़ का एक दिन' (सन् 1958) नाटककार मोहन राकेश द्वारा रचित हिंदी के आधुनिक युग का प्रथम नाटक कहा जाता है।...